लेखक: डॉ. आशीष मीनोचा (MD Ayurveda)
आज के समय में मधुमेह (Diabetes) एक तेजी से बढ़ने वाली जीवनशैली से जुड़ी बीमारी बन चुकी है। भारत को आज “Diabetes Capital of the World” भी कहा जाने लगा है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग इस रोग से प्रभावित हैं।
मधुमेह केवल रक्त में शुगर बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म और अग्नि (पाचन शक्ति) के असंतुलन का परिणाम है।
???? आयुर्वेद में मधुमेह का वर्णन
आयुर्वेद में मधुमेह को प्रमेह कहा गया है।
आचार्य चरक कहते हैं —
“प्रभूतमूत्रता यस्मात् प्रमेहः स उच्यते।”
— चरक संहिता
अर्थात जिसमें बार-बार और अधिक मात्रा में मूत्र आता है, उस रोग को प्रमेह कहा जाता है।
मधुमेह प्रमेह का ही एक प्रमुख प्रकार है जिसमें मूत्र में मधुरता (Sugar) बढ़ जाती है।
